लोहे के मर्द

पुरुष वीर बलवान,
देश की शान,
हमारे नौजवान
घायल होकर आये हैं।

कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
अक्षत क्यों लाये हो?

हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

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Written: November 1, 1962
Collection: Parshuram Kee Prateeksha (Published: 1963)

59 Replies to “लोहे के मर्द”

  1. I have been on a lookout for a age old poem, written by Ramdhari singh Dinkar ji. I dont remember the title, but i know the lines, that goes like this…”Kyaa kaha? Kashmir de doon? Hind ki Jaageer de doon?……. rest i dont remember.This i read around 25 years back. If you could please help me in locating the poetry, i wd be very thankful.

  2. लोहे के मर्द October 16, 2005
    Posted by Jaya in Ramdhari Singh ‘Dinkar’. trackback
    पुरुष वीर बलवान,
    देश की शान,
    हमारे नौजवान
    घायल होकर आये हैं।

    कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
    अक्षत क्यों लाये हो?

    हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
    फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

    तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
    सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

    ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
    ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

    तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
    दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

  3. mujhe inki “bhagna mandir ban raha hai” ki talash hai kripya ise chapne ki kripa kare.
    dinkarji ki tarif karna apni samarthya se bahar hai
    aasman se jami talak sari kaynath ka vistar ho tum

  4. mujhe inki “bhagna mandir ban raha hai” ki talash hai kripya ise chapne ki kripa kare.
    dinkarji ki tarif karna apni samarthya se bahar hai
    aasman se jami talak sari kaynath ka vistar ho tum

  5. mujhe inki “bhagna mandir ban raha hai” ki talash hai kripya ise chapne ki kripa kare.
    dinkarji ki tarif karna apni samarthya se bahar hai
    aasman se jami talak sari kaynath ka vistar ho tum

  6. hi,actually ‘m lookin for one of his poem..written by him against one of his critics.the theme was based on the event in mahabharata when in childhood krishna had fight with snake and won it.

  7. पुरुष वीर बलवान,
    देश की शान,
    हमारे नौजवान
    घायल होकर आये हैं।

    कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
    अक्षत क्यों लाये हो?

    हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
    फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

    तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
    सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

    ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
    ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

    तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
    दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

    Other Information

  8. @
    daisy

    i know the poem u are looking for
    “kshama shobhti us bhujang ko
    jiske paas garal ho…”

    i m fortunate that i belong to Bihar the place of dinkar ji…

  9. i know the poem u are looking for
    “kshama shobhti us bhujang ko
    jiske paas garal ho…”

    i m fortunate that i belong to Bihar the place of dinkar ji…

  10. i know the poem u are looking for
    “kshama shobhti us bhujang ko
    jiske paas garal ho…”

    i m fortunate that i belong to Bihar the place of dinkar ji…

  11. i’m looking for his poem,Kalam ya ki thalvaar

    May be the title is not exactly the same
    It starts with
    ” Do mey say kya thumhey chaahiye kalam ya ki thalvaar?
    Man may uchch bhaav ya than may shakthi ajay apaar”

  12. पुरुष वीर बलवान,
    देश की शान,
    हमारे नौजवान
    घायल होकर आये हैं।

    कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
    अक्षत क्यों लाये हो?

    हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
    फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

    तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
    सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

    ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
    ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

    तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
    दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

    1. I used to have the complete text of his lekh ” himmat aur zindagi”. I had copied it form my text book of class 10th. I think i still have it. Will try to search it and immediately put it on net.

      1. साहस की ज़िंदगी सबसे बड़ी ज़िंदगी होती है. ऐसी ज़िंदगी की सबसे बड़ी
        पहचान यह है कि वह बिलकुल निडर, बिलकुल बेखौफ़ होती है. साहसी मनुष्य की
        पहली पहचान यह है कि वह इस बात कि चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग
        उसके बारे में क्या सोच रहे हैं. जनमत कि उपेक्षा करके जीने वाला आदमी
        दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता
        है. अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना, यह साधारण जीव का काम है. क्रांति करने
        वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं और न
        अपनी चाल को ही पड़ोसी की चाल देखकर मदधिम बनाते
        हैं.साहसी मनुष्य उन सपनों में भी रस लेता है जिन
        सपनों का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है.साहसी मनुष्य
        सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है.
        झुंड में चलना और झुंड में चरना, यह भैंस और भेड़ का काम है. सिंह तो
        बिलकुल अकेला होने पर भी मगन रहता है.

    2. yes, i remember HIMMAT AUR ZINDAGI …JO CLASS 9th ME MAINE PADHI THI……साहस की ज़िंदगी सबसे बड़ी ज़िंदगी होती है. ऐसी ज़िंदगी की सबसे बड़ी
      पहचान यह है कि वह बिलकुल निडर, बिलकुल बेखौफ़ होती है. साहसी मनुष्य की
      पहली पहचान यह है कि वह इस बात कि चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग
      उसके बारे में क्या सोच रहे हैं. जनमत कि उपेक्षा करके जीने वाला आदमी
      दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता
      है. अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना, यह साधारण जीव का काम है. क्रांति करने
      वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं और न
      अपनी चाल को ही पड़ोसी की चाल देखकर मदधिम बनाते
      हैं.साहसी मनुष्य उन सपनों में भी रस लेता है जिन
      सपनों का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है.साहसी मनुष्य
      सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है.
      झुंड में चलना और झुंड में चरना, यह भैंस और भेड़ का काम है. सिंह तो
      बिलकुल अकेला होने पर भी मगन रहता है.

      1. hey prabha,

        it would be nice if you can post the entire content….let me know if u need any help for simplying the writing process.

        thanks

      2. Hey Prabha ..Would be great if you could post the entire text.. I have been looking for it quite desperately…It’s one of the most powerful essays ever written…Please help in bringing it out in front of more readers..Thanks

      3. hey parbha,
        pls send the whole content on my id. i will be very thankful 2 u. I m searching 4 it a long time. Its my favourite one.

    3. Tusti karan Niti ka
      SANGHAR chahiye,
      SINE me Aag
      KANTH me HUNkar
      chahiye,
      BAPU ka RamRajya
      SavaLo me ghir gaya
      Hame Subhash Bose
      ki Sarkar chaiiye…?
      Dt:23,MEET,7pm
      /EVERy MONTh/
      Netajee BHaRat.

  13. पुरुष वीर बलवान,
    देश की शान,
    हमारे नौजवान
    घायल होकर आये हैं।

    कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
    अक्षत क्यों लाये हो?

    हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
    फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

    तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
    सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

    ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
    ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

    तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
    दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

  14. पुरुष वीर बलवान,
    देश की शान,
    हमारे नौजवान
    घायल होकर आये हैं।

    कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
    अक्षत क्यों लाये हो?

    हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
    फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

    तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
    सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

    ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
    ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

    तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
    दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो। mine is the best copy this and read this if u like it it rox dude

  15. Hi! It’s really nice site as well as nice collection of hindi poems. But can u plz make ur collection vast so that we no need to go any other website. Thanks n regards

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